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You searched for: collection:opensource AND language:"हिंदी"
[texts]अभिप्राय और अर्थ - प्रफुल्ल कोलख्यान
डिब्बे के ऊपर की इबारत चाहे जो बताये गृहस्थ जानता है कि किस डिब्बे में चीनी है किस में नमक! क्षण-क्षण रीतते हुए शब्दों में गृहस्थी के काम लायक अर्थ सँजोने की चिंता करनी ही होगी। आजकल सामान का व्...
Keywords: कोलख्यान,हिंदी,hindi,kolkhyan
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता
Keywords: कोलख्यान,कविता,kolkhyan
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[texts]भाषा में भ्रांति - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
भाषा सामाजिकता की जीवनी शक्ति और सौंदर्य-शक्ति को भी सुगठित और संरक्षित करती है। लक्षित किया जा सकता है कि कैसे एक भाषा के गर्भ में पलती हुई दूसरी भाषा उससे बाहर निकलकर एक नये भाषिक प्रस्थान क...
Keywords: कोलख्यान,Kolkhyan
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[texts]रवींद्रनाथ ठाकुर को याद करने का मतलब - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
विश्व संस्कृति की एकत्व चेतना, भक्ति साहित्य की सामाजिक चेतना और आधुनिक समय की राजनीतिक चेतना के समन्वित तत्त्व से रवींद्रनाथ ठाकुर के अद्भुत व्यक्तित्व का गठन हुआ। रवींद्रनाथ के साहित्य म...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan; ravindranath; bangla; alochana
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[texts]पत्रहीन नग्न गाछ - प्रफुल्ल कोलख्यान
पीढ़ी के प्रतिनिधि नायक का अद्भुत उत्तर सुनकर, सहम गई थी वह चिड़िया जिसके पूरे वजूद को अनदेखा कर सिर्फ उसकी आँख को ही देख पाने को स्वीकारा था प्रतिनिधि नायक ने! विकल हो गया था वृक्ष जो रह गया था ...
Keywords: कोलख्यान; hindi
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की तीन कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
सचमुच एक दुर्लभ दृश्य है स्तनपान कराती हुई माता को देखना जब मैंने आर्टगैलरी में एक ऐसी ही पेंटिंग पर मुग्ध होते विदेशी को देखा तो महसूस किया
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान,कविता; kavitayen
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[texts]दुविधा में नीलू - प्रफुल्ल कोलख्यान
गरीब के घर की दीवारें कच्ची होती है। दीवारों के किसी कमजोर हिस्से को धराशायी करती हुई खुशियाँ निकल भी जाती है। यह नहीं कि हर बार ऐसा ही होता है लेकिन अधिकतर बार ऐसा ही होता है। ऐसा है यह दुश्चक्...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]अच्छी हिंदी - प्रफुल्ल कोलख्यान
मेरी हिंदी बहुत ही कमजोर थी। आज भी बहुत मजबूत होने का दावा नहीं है। लिखने में बहुत ही अशुद्धियाँ हुआ करती थीं। अशुद्धियाँ आज नहीं होती हैं, ऐसा नहीं है। लेकिन पहले होनेवाली अशुद्धियों की तुलन...
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान
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[texts]प्रार्थना और प्रहार - प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रार्थना प्राण का कवच नहीं बन सकती। प्रार्थना चाहे जितनी विशिष्ट क्यों न हो वह अंतत: रिरियाहट ही होती है। एक ऐसी रिरियाहट जिसकी कोख में पलती रहती है बर्बरता। किसी कल्पित देवता के मने रिरिया...
Keywords: कोलख्यान; प्रार्थना; kolkhyan
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
चिता की लपट मद्धम न पड़ जाये और उजाला किये जाने का भरम बना रहे इसका ख्यालकर तेजी से सुलगाये जा रहे हैं जंगल
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]आलोचना और समाज - प्रफुल्ल कोलख्यान
समाज में पहले से व्याप्त यौनमूलक भेद-भाव और शोषण का सहारा लेकर विकृतिकरण का यह प्रयास अधिक समतामूलक दीखने और अपनी वैधता साबित करने में सफल हो जाता है।... बाजार, धर्म, काम और भाषा की आत्मिक संश्ल...
Keywords: कोलख्यान; समाज; आलोचना; kolkhyan
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[texts]जल कर जो रौशन करे जिंदगी को, जहान को - प्रफुल्ल कोलख्यान
इस गुत्थी को समझना दिलचस्प हो सकता है कि क्यों प्रेमचंद न तो ब्राह्मणवादियों को स्वीकार्य होते हैं और न ही ब्राह्मणवाद के तथाकथित विरोधियों को ही स्वीकार्य हो पाते हैं। जरा ठहरकर गहराई से वि...
Keywords: कोलख्यान,हिंदी,kolhyan,hindi; premchand; dalit; alochana; hindi
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[texts]ओनामासीधं - प्रफुल्ल कोलख्यान
बचपन में हमलोग ओनामासीधं गुरूजी खसला -- गिर पड़े -- चितंग कहकर अपने गुरूडमयुक्त साथी के साथ ठट्ठा किया करते थे। बाद में जाना कि असल में ‘ऊँ नम: सिद्धम’ ही जनविमुख होकर अंतत: ‘ओनामासीधं’ के रूप मे...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]अपने वतन में पराए - प्रफुल्ल कोलख्यान (Prafulla kolkhyan)
अपने मूल भाषा-क्षेत्र से बाहर रह कर छोटे-मोटे रोजगार और खुदरा कारोबार में लगे लोगों को निकृष्टतम अर्थों में अपने ‘बाहरी’ होने का भारी दबाव झेलना पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि राज्य सरकारों की निग...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan
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[texts]नामवर सिंहः सहज दृष्टि की जटिल वाग्मिता - प्रफुल्ल कोलख्यान
जीवन में रोटी बहुत जमीन घेरती है। रोटी खाने के बाद भी कुछ जमीन बची रहती है। इसी बची हुई जमीन पर सपनों का नाच होता है। अधिकतर लोग रोटी के साथ जमीन भी खाते हुए चलते हैं, और सपने ! सपनों का नाच खत्म हो...
Keywords: कोलख्यान; नामवर; आलोचना; kolkhyan; namvar; alochana; hindi
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[texts]गुजरात के गाँधी और अयोध्या के राम - प्रफुल्ल कोलख्यान
राम को अयोध्या और गाँधी को गुजरात में सीमित करना स्थानीयकरण की प्रक्रिया का ही प्रकार्य तो नहीं है! कहीं हम अपनी मासूमियत में राम और गाँधी जैसे जनता के चित्त-नायक के विसर्जन और बाजार के वित्त-...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]प्रेम जो हाट बिकाय - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
चित्त की प्रेमावस्था में मनुष्य के लिए कुछ भी अ-देय नहीं रहता है। प्रेम में माता हुआ मनुष्य सबकुछ दे देना चाहता है। प्रेम में माता हुआ मनुष्य एक ऐसे दान योगी की तरह का आचरण करता है जैसे संसार की...
Keywords: कोलख्यान,हाट,kolkhyan; kabir; prem
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[texts]दूर के रिश्तेदार - प्रफुल्ल कोलख्यान
झुर्रियों की लिपि दर्द की भाषा पढ़ने की कोई तरकीब होती या रिश्तों की दूरी मापनेवाला कोई फीता होता तो कोई बड़ी आसानी से नाप ले सकता कि मैं और मेरे जैसे बहुत सारे बेटे अपने-अपने माँ-बाप के कितने द...
Keywords: कोलख्यान,हिंदी,kolkhyan,hindi
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कुछ कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
Prafulla Kolkhyan Ki Kavitayen.
Keywords: kolkhyan,कोलख्यान,कविता; hindi
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[texts]व्यक्ति, समाज और साहित्य - Prafulla Kolkhyan प्रफुल्ल कोलख्यान
जिन मगरमच्छों से मछली को प्राण का सदा भय बना रहता है उन मगरमच्छों के भी जीवन का आधार पानी ही देता है। इस कारण पानी मछली का वैरी नहीं हो जाता है। मगरमच्छ तो जब चाहे कुछ क्षण के लिए पानी से बाहर निक...
Keywords: कोलख्यान,समाज,व्यक्ति,साहित्य,आलोचनाkolkhyan; Hindi; sahitya
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[texts]अंतःकरण का आयतन - प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan
वृद्धि ढाँचे में होनेवाला बाहरी फैलाव है और विकास अंतर्वस्तु का आंतरिक प्रसार। यह सच है कि बाहरी ढाँचे की वृद्धि से अंतर्वस्तु के प्रसार में सहयोग प्राप्त होता है। लेकिन यह तब होता है जब वृद...
Keywords: कोलख्यान,kolkhyan; Hindi; Bhartiyta; Antahkaran
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[texts]बिगाड़ का डर और ईमान की बात - प्रफुल्ल कोलख्यान
किसी भी समाज-व्यवस्था के चरित्र और स्वास्थ्य के संकेत उसकी न्याय-प्रणाली की प्रभावशीलता से भी भासित होते हैं। ऐसी न्याय-प्रणाली सिर्फ वैधानिक न्याय से सीमित न हो कर विवेक नि:सृत परम-सामाजिक-...
Keywords: प्रेमचंद,कोलख्यान,हिंदी,Kolkhyan,hindi,premchand
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[texts]किसने कहा जय किसान - प्रफुल्ल कोलख्यान
आज स्कूलों में न तो प्रार्थना है, न संविधान की प्रस्तावना के हम लोग और न ही भारत माता। न तो बच्चों के मन में उस प्रकार की जिज्ञासा है और न ही परिवार में उस दादी माँ के लिए कोई जगह है  जिसमें अपने क...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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